Surah Waqiah Read Online in English with PDF Download 2023

अस्सलाम वालेकुम इस आर्टिकल में आप Surah Waqiah के बारे में आप पढ़ सकते हैं और जान सकते हैं। और सूरह वक़िया अंग्रेजी में, सूरह वक़िया हिंदी में और अरबी में सूरह वक़िया में भी पढ़ सकते हैं। अरबी में सूरह वक़िया PDF भी Download कर सकते हैं। जिसके बारे में पूरी जानकारी दी गई है। जो लोग इस सूरह पढ़ना और उसके बारे में जानना चाहते हैं तो वे लोग आसानी से इस आर्टिकल में पढ़ सकते हैं।

दोस्तों Surah Waqiah (सूरह वक़िया) क़ुरान-ए-पाक की 56 वीं सूरत है। सूरह वक़िया मक्का में नाज़िल हुई (देखें मक्की सूरतों में), खासतौर पर हिज्रत से तक़रीबन 7 (सात साल पहले 622) मैं, मुहम्मद की मक्का से मदीना हिज्रत से। इस सूरत अलवा क्या मैं आयात की कल तादाद 96 है। इस में बुनियादी तौर पर इस्लाम के मुताबिक़ बाद की ज़िंदगी के बारे में बेहस की गई है, और इस में लोगों को यक़ीनी तौर पर मुख़्तलिफ़ तक़दीर का सामना करना पड़ेगा।

Table of Contents

Surah Waqiah Kya Hai | सूरह वक़िया क्या है

सूरह वक़िया (Surah Waqiah) क़ुरान-ए-पाक की56वीं सूरत है और27वीं पारा में मौजूद है। इस सूरत में96 आयात,428 कलिमात और1723 हुरूफ़ हैं और इस के नुज़ूल की जगह मक्की है इसलिए उसे मक्की सूरा कहा जाता है

Surah Waqiah (सूरह वक़िया), जिसे “नागुज़ीर या “वाक़िया भी कहा जाता है, क़ुरआन का56 वां बाब है। ये क़ियामत के तसव्वुर पर-ज़ोर देता है, लोगों की मुख़्तलिफ़ इक़साम और बाद की ज़िंदगी में उनकी क़िस्मत को बयान करता है। ये बाब किसी के आमाल के नताइज की एक ताक़तवर याद-दहानी है और आख़िरत के लिए ग़ौर-ओ-फ़िक्र और तैयारी की दावत का काम करता है।

क़ियामत के मुनाज़िर की इस की पेचीदा वज़ाहतें क़ुरआन की वाज़िह तस्वीर को नुमायां करती हैं। बहुत से करानी तराजुम इस सूरत की तशरीहात फ़राहम करते हैं, उस के जोहर को हासिल करते हैं और इस का गहरा पैग़ाम क़ारईन तक पहुंचाते हैं

Surah Waqiah Read Online in English | सूरह वक़िया अंग्रेजी में

यहां हमने Surah Waqiah Read Online in English बताया है जहां आप सूरह वक़िया सूरह वक़िया अंग्रेजी में पढ़ सकते हैं और याद कर सकते हैं और ढेर सारी नेकियां कमा सकते हैं सो नीचे दिए गए सूरह वक़िया आप पढ़ सकते हैं

Bismillaahir Rahmaanir Raheem

  1. Izaa waqa’atil waaqi’ah
  2. Laisa liwaq’atihaa kaazibah
  3. Khafidatur raafi’ah
  4. Izaa rujjatil ardu rajjaa
  5. Wa bussatil jibaalu bassaa
  6. Fakaanat habaaa’am mumbassaa
  7. Wa kuntum azwaajan salaasah
  8. Fa as haabul maimanati maaa as haabul maimanah
  9. Wa as haabul mash’amati maaa as haabul mash’amah
  10. Wassaabiqoonas saabiqoon
  11. Ulaaa’ikal muqarraboon
  12. Fee Jannaatin Na’eem
  13. Sullatum minal awwaleen
  14. Wa qaleelum minal aa khireen
  15. ‘Alaa sururim mawdoonah
  16. Muttaki’eena ‘alaihaa mutaqabileen
  17. Yatoofu ‘alaihim wildaa num mukhalladoon
  18. Bi akwaabinw wa abaareeq, wa kaasim mim ma’een
  19. Laa yusadda’oona ‘anhaa wa laa yunzifoon
  20. Wa faakihatim mimmaa yatakhaiyaroon
  21. Wa lahmi tairim mimmaa yashtahoon
  22. Wa hoorun’een
  23. Ka amsaalil lu’lu’il maknoon
  24. Jazaaa’am bimaa kaanoo ya’maloon
  25. Laa yasma’oona feehaa laghwanw wa laa taaseemaa
  26. Illaa qeelan salaaman salaamaa
  27. Wa as haabul yameeni maaa as haabul Yameen
  28. Fee sidrim makhdood
  29. Wa talhim mandood
  30. Wa zillim mamdood
  31. Wa maaa’im maskoob
  32. Wa faakihatin kaseerah
  33. Laa maqtoo’atinw wa laa mamnoo’ah
  34. Wa furushim marfoo’ah
  35. Innaaa anshaanaahunna inshaaa’aa
  36. Faja’alnaahunna abkaaraa
  37. ‘Uruban atraabaa
  38. Li as haabil yameen
  39. Sullatum minal awwa leen
  40. Wa sullatum minal aakhireen
  41. Wa as haabush shimaali maaa as haabush shimaal
  42. Fee samoominw wa hameem
  43. Wa zillim miny yahmoom
  44. Laa baaridinw wa laa kareem
  45. Innahum kaanoo qabla zaalika mutrafeen
  46. Wa kaanoo yusirroona ‘alal hinsil ‘azeem
  47. Wa kaanoo yaqooloona a’izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa izaaman’ainnaa lamab’oosoon
  48. Awa aabaaa’unal awwaloon
  49. Qul innal awwaleena wal aakhireen
  50. Lamajmoo’oona ilaa meeqaati yawmim ma’loom
  51. summa innakum ayyuhad daaalloonal mukazziboon
  52. La aakiloona min shaja rim min zaqqoom
  53. Famaali’oona minhal butoon
  54. Fashaariboona ‘alaihi minal hameem
  55. Fashaariboona shurbal heem
  56. Haazaa nuzuluhum yawmad deen
  57. Nahnu khalaqnaakum falaw laa tusaddiqoon
  58. Afara’aytum maa tumnoon
  59. ‘A-antum takhluqoo nahooo am nahnul khaaliqoon
  60. Nahnu qaddarnaa baina kumul mawta wa maa nahnu bimasbooqeen
  61. ‘Alaaa an nubaddila amsaalakum wa nunshi’akum fee maa laa ta’lamoon
  62. Wa laqad ‘alimtumun nash atal oolaa falaw laa tazakkaroon
  63. Afara’aytum maa tahrusoon
  64. ‘A-antum tazra’oonahooo am nahnuz zaari’ooon
  65. Law nashaaa’u laja’al naahu hutaaman fazaltum tafakkahoon
  66. Innaa lamughramoon
  67. Bal nahnu mahroomoon
  68. Afara’aytumul maaa’allazee tashraboon
  69. ‘A-antum anzaltumoohu minal muzni am nahnul munziloon
  70. Law nashaaa’u ja’alnaahu ujaajan falaw laa tashkuroon
  71. Afara’aytumun naaral latee tooroon
  72. ‘A-antum anshaatum shajaratahaaa am nahnul munshi’oon
  73. Nahnu ja’alnaahaa tazkira tanw wa mataa’al lilmuqween
  74. Fasabbih bismi Rabbikal ‘azeem
  75. Falaa uqsimu bimaawaa qi’innujoom
  76. Wa innahoo laqasamul lawta’lamoona’azeem
  77. Innahoo la quraanun kareem
  78. Fee kitaabim maknoon
  79. Laa yamassuhooo illal mutahharoon
  80. Tanzeelum mir Rabbil’aalameen
  81. Afabihaazal hadeesi antum mudhinoon
  82. Wa taj’aloona rizqakum annakum tukazziboon
  83. Falaw laaa izaa balaghatil hulqoom
  84. Wa antum heena’izin tanzuroon
  85. Wa nahnu aqrabu ilaihi minkum wa laakil laa tubsiroon
  86. Falaw laaa in kuntum ghaira madeeneen
  87. Tarji’oonahaaa in kuntum saadiqeen
  88. Fa ammaaa in kaana minal muqarrabeen
  89. Farawhunw wa raihaa nunw wa jannatu na’eem
  90. Wa ammaaa in kaana min as haabil yameen
  91. Fasalaamul laka min as haabil yameen
  92. Wa ammaaa in kaana minal mukazzibeenad daaalleen
  93. Fanuzulum min hameem
  94. Wa tasliyatu jaheem
  95. Inna haaza lahuwa haqqul yaqeen
  96. Fasabbih bismi rabbikal ‘azeem

Read Surah Waqiah Full in Hindi | सूरह वक़िया हिंदी में

यहां हमने Read Surah Waqiah Full in Hindi बताया है जहां आप सूरह वक़िया को हिंदी में पढ़ सकते हैं और याद कर सकते हैं और ढेर सारी नेकियां कमा सकते हैं सो नीचे दिए गए सूरह वक़िया आप पढ़ सकते हैं

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

1. इज़ा वक अतिल वाकिअह

2. लैसा लिवक अतिहा काज़िबह

3. खाफिज़तुर राफि अह

4. इज़ा रुज्जतिल अरजु रज्जा

5. व बुस्सतिल जिबालु बस्सा

6. फकानत हबा अम मुम्बस्सा

7. व कुन्तुम अजवाजन सलासह

8. फ अस्हाबुल मय्मनति मा अस्हाबुल मय्मनह

9. व अस्हाबुल मश अमति मा अस्हाबुल मश अमह

10. वस साबिकूनस साबिकून

11. उला इकल मुक़र्रबून

12. फ़ी जन्नातिन नईम

13. सुल्लतुम मिनल अव्वलीन

14. व क़लीलुम मिनल आखिरीन

15. अला सुरुरिम मौजूनह

16. मुत्तकि ईना अलैहा मुतकाबिलीन

17. यतूफु अलैहिम विल्दानुम मुखल्लदून

18. बिअक्वाबिव व अबारीका व कअ’सिम मिम मईन

19. ला युसद्द ऊना अन्हा वला युन्ज़िफून

20. व फाकिहतिम मिम्मा यता खैयरून

21. वलहमि तैरिम मिम्मा यश तहून

22. व हूरून ईन

23. कअम्सा लिल लुअ’लुइल मक्नून

24. जज़ा अम बिमा कानू यअ’मलून

25. ला यस्मऊना फ़ीहा लग्वव वला तअसीमा

26. इल्ला कीलन सलामन सलामा

27. व अस्हाबुल यामीनि मा अस्हाबुल यमीन

28. फ़ी सिदरिम मख्जूद

29. व तल्हिम मन्जूद

30. व ज़िल्लिम मम्दूद

31. वमा इम मस्कूब

32. व फाकिहतिन कसीरह

33. ला मक़्तू अतिव वला ममनूअह

34. व फुरुशिम मरफूअह

35. इन्ना अनशअ नाहुन्ना इंशाआ

36. फज अल्नाहुन्ना अब्कारा

37. उरुबन अतराबा

38. लि अस्हाबिल यमीन

39. सुल्लतुम मिनल अव्वलीन

40. वसुल्लतुम मिनल आखिरीन

41. व अस्हाबुश शिमालि मा अस्हाबुश शिमाल

42. फ़ी समूमिव व हमीम

43. व ज़िल्लिम मिय यहमूम

44. ला बारिदिव वला करीम

45. इन्नहुम कानू क़ब्ला ज़ालिका मुतरफीन

46. व कानू युसिर्रूना अलल हिन्सिल अज़ीम

47. व कानू यकूलूना अ इज़ा मितना व कुन्ना तुराबव व इज़ामन अ इन्ना लमब ऊसून

48. अवा आबाउनल अव्वलून

49. कुल इन्नल अव्वलीना वल आखिरीन

50. लमज मूऊना इला मीकाति यौमिम मालूम

51. सुम्मा इन्नकुम अय्युहज़ ज़ाल्लूनल मुकज्ज़िबून

52. ल आकिलूना मिन शजरिम मिन ज़क्कूम

53. फ मालिऊना मिन्हल बुतून

54. फ शारिबूना अलैहि मिनल हमीम

55. फ शारिबूना शुरबल हीम

56. हाज़ा नुज़ुलुहुम यौमद दीन

57. नहनु खलक्नाकुम फलौला तुसद्दिकून

58. अफा रअय्तुम मा तुम्नून

59. अ अन्तुम तख्लुकूनहु अम नहनुल खालिकून

60. नहनु क़द्दरना बय्नकुमुल मौता वमा नहनु बिमस्बूकीन

61. अला अन नुबददिला अम्सालकुम व नुन्शिअकुम फ़ी माला तअ’लमून

62. व लक़द अलिम्तुमुन नश अतल ऊला फलौला तज़क करून

63. अफा रअय्तुम मा तहरुसून

64. अ अन्तुम तजर उनहू अम नहनुज़ जारिऊन

65. लौ नशाऊ लजा अल्नाहु हुतामन फज़ल तुम तफक्कहून

66. इन्ना ल मुगरमून

67. बल नहनु महरूमून

68. अफा रअय्तुमुल माअल्लज़ी तशरबून

69. अ अन्तुम अन्ज़ल्तुमूहु मिनल मुज्नि अम नहनुल मुन्ज़िलून

70. वलौ नशाऊ ज अल्नाहू उजाजन फलौला तश्कुरून

71. अफा रअय्तुमुन नारल लती तूरून

72. अ अन्तुम अनश’अतुम शजरतहा अम नहनुल मुन्शिऊन

73. नहनु जअल्नाहा तज्किरतव व मताअल लिल मुक्वीन

74. फ़सब्बिह बिस्मि रब्बिकल अज़ीम

75. फला उक्सिमु बि मवाक़िइन नुजूम

76. व इन्नहू ल क़समुल लौ तअ’लमूना अज़ीम

77. इन्नहू लकुर आनून करीम

78. फ़ी किताबिम मक्नून

79. ला यमस्सुहू इल्लल मुतह हरून

80. तन्जीलुम मिर रब्बिल आलमीन

81. अफा बिहाज़ल हदीसि अन्तुम मुद हिनून

82. व तज अलूना रिज्क़कुम अन्नकुम तुकज्ज़िबून

83. फलौला इज़ा बला गतिल हुल्कूम

84. व अन्तुम ही नइजिन तन्ज़ुरून

85. व नहनु अकरबु इलैहि मिन्कुम वला किलला तुब्सिरून

86 फ़लौला इन कुन्तुम गैरा मदीनीन

87. तर जिऊनहा इन कुन्तुम सदिकीन

88. फअम्मा इन कान मिनल मुक़र्रबीन

89. फ़ रौहुव व रैहानुव व जन्नतु नईम

90. व अम्मा इन कान मिन अस्हाबिल यमीन

91. फ़ सलामुल लका मिन अस्हाबिल यमीन

92. व अम्मा इन कान मिनल मुकज्ज़िबीनज़ जाल लीन

93. फ नुज़ुलुम मिन हमीम

94. व तस्लियतु जहीम

95. इन्ना हाज़ा लहुवा हक्कुल यक़ीन

96. फ़ सब्बिह बिस्मि रब्बिकल अज़ीम

Surah Waqiah in Arabic| सूरह वक़िया अरबी में

यहां हमने Surah Waqiah in Arabic बताया है जहां आप सूरह वक़िया को Arabic में पढ़ सकते हैं और याद कर सकते हैं और ढेर सारी नेकियां कमा सकते हैं सो नीचे दिए गए सूरह वक़िया को आप Arabic में पढ़ सकते हैं

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ

اِذَا وَقَعَتِ الْوَاقِعَةُۙ(۱) لَیْسَ لِوَقْعَتِهَا كَاذِبَةٌۘ(۲) خَافِضَةٌ رَّافِعَةٌۙ(۳) اِذَا رُجَّتِ الْاَرْضُ رَجًّاۙ(۴) وَّ بُسَّتِ الْجِبَالُ بَسًّاۙ(۵) فَكَانَتْ هَبَآءً مُّنْۢبَثًّاۙ(۶) وَّ كُنْتُمْ اَزْوَاجًا ثَلٰثَةًؕ(۷) فَاَصْحٰبُ الْمَیْمَنَةِ مَاۤ اَصْحٰبُ الْمَیْمَنَةِؕ(۸) وَ اَصْحٰبُ الْمَشْــٴَـمَةِ مَاۤ اَصْحٰبُ الْمَشْــٴَـمَةِؕ(۹) وَ السّٰبِقُوْنَ السّٰبِقُوْنَۚۙ(۱۰) اُولٰٓىٕكَ الْمُقَرَّبُوْنَۚ(۱۱) فِیْ جَنّٰتِ النَّعِیْمِ(۱۲) ثُلَّةٌ مِّنَ الْاَوَّلِیْنَۙ(۱۳) وَ قَلِیْلٌ مِّنَ الْاٰخِرِیْنَؕ(۱۴) عَلٰى سُرُرٍ مَّوْضُوْنَةٍۙ(۱۵) مُّتَّكِـٕیْنَ عَلَیْهَا مُتَقٰبِلِیْنَ(۱۶) یَطُوْفُ عَلَیْهِمْ وِلْدَانٌ مُّخَلَّدُوْنَۙ(۱۷) بِاَكْوَابٍ وَّ اَبَارِیْقَ وَ كَاْسٍ مِّنْ مَّعِیْنٍۙ(۱۸) لَّا یُصَدَّعُوْنَ عَنْهَا وَ لَا یُنْزِفُوْنَۙ(۱۹) وَ فَاكِهَةٍ مِّمَّا یَتَخَیَّرُوْنَۙ(۲۰) وَ لَحْمِ طَیْرٍ مِّمَّا یَشْتَهُوْنَؕ(۲۱) وَ حُوْرٌ عِیْنٌۙ(۲۲) كَاَمْثَالِ اللُّؤْلُؤِ الْمَكْنُوْنِۚ(۲۳) جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوْا یَعْمَلُوْنَ(۲۴) لَا یَسْمَعُوْنَ فِیْهَا لَغْوًا وَّ لَا تَاْثِیْمًاۙ(۲۵) اِلَّا قِیْلًا سَلٰمًا سَلٰمًا(۲۶) وَ اَصْحٰبُ الْیَمِیْنِ مَاۤ اَصْحٰبُ الْیَمِیْنِؕ(۲۷) فِیْ سِدْرٍ مَّخْضُوْدٍۙ(۲۸) وَّ طَلْحٍ مَّنْضُوْدٍۙ(۲۹) 

وَّ ظِلٍّ مَّمْدُوْدٍۙ(۳۰) وَّ مَآءٍ مَّسْكُوْبٍۙ(۳۱) وَّ فَاكِهَةٍ كَثِیْرَةٍۙ(۳۲) لَّا مَقْطُوْعَةٍ وَّ لَا مَمْنُوْعَةٍۙ(۳۳) وَّ فُرُشٍ مَّرْفُوْعَةٍؕ(۳۴) اِنَّاۤ اَنْشَاْنٰهُنَّ اِنْشَآءًۙ(۳۵) فَجَعَلْنٰهُنَّ اَبْكَارًاۙ(۳۶) عُرُبًا اَتْرَابًاۙ(۳۷) لِّاَصْحٰبِ الْیَمِیْنِ(۳۸) ﮒ ثُلَّةٌ مِّنَ الْاَوَّلِیْنَۙ(۳۹) وَ ثُلَّةٌ مِّنَ الْاٰخِرِیْنَؕ(۴۰) وَ اَصْحٰبُ الشِّمَالِ مَاۤ اَصْحٰبُ الشِّمَالِؕ(۴۱) فِیْ سَمُوْمٍ وَّ حَمِیْمٍۙ(۴۲) وَّ ظِلٍّ مِّنْ یَّحْمُوْمٍۙ(۴۳) لَّا بَارِدٍ وَّ لَا كَرِیْمٍ(۴۴) اِنَّهُمْ كَانُوْا قَبْلَ ذٰلِكَ مُتْرَفِیْنَۚۖ(۴۵) وَ كَانُوْا یُصِرُّوْنَ عَلَى الْحِنْثِ الْعَظِیْمِۚ(۴۶) وَ كَانُوْا یَقُوْلُوْنَ اَىٕذَا مِتْنَا وَ كُنَّا تُرَابًا وَّ عِظَامًا ءَاِنَّا لَمَبْعُوْثُوْنَۙ(۴۷) اَوَ اٰبَآؤُنَا الْاَوَّلُوْنَ(۴۸) قُلْ اِنَّ الْاَوَّلِیْنَ وَ الْاٰخِرِیْنَۙ(۴۹) لَمَجْمُوْعُوْنَ اِلٰى مِیْقَاتِ یَوْمٍ مَّعْلُوْمٍ(۵۰) ثُمَّ اِنَّكُمْ اَیُّهَا الضَّآلُّوْنَ الْمُكَذِّبُوْنَۙ(۵۱) لَاٰكِلُوْنَ مِنْ شَجَرٍ مِّنْ زَقُّوْمٍۙ(۵۲) فَمَالِــٴُـوْنَ مِنْهَا الْبُطُوْنَۚ(۵۳)  فَشٰرِبُوْنَ عَلَیْهِ مِنَ الْحَمِیْمِۚ(۵۴) فَشٰرِبُوْنَ شُرْبَ الْهِیْمِؕ(۵۵) هٰذَا نُزُلُهُمْ یَوْمَ الدِّیْنِؕ(۵۶) نَحْنُ خَلَقْنٰكُمْ فَلَوْ لَا تُصَدِّقُوْنَ(۵۷) اَفَرَءَیْتُمْ مَّا تُمْنُوْنَؕ(۵۸) ءَاَنْتُمْ تَخْلُقُوْنَهٗۤ اَمْ نَحْنُ الْخٰلِقُوْنَ(۵۹) 

نَحْنُ قَدَّرْنَا بَیْنَكُمُ الْمَوْتَ وَ مَا نَحْنُ بِمَسْبُوْقِیْنَۙ(۶۰) عَلٰۤى اَنْ نُّبَدِّلَ اَمْثَالَكُمْ وَ نُنْشِئَكُمْ فِیْ مَا لَا تَعْلَمُوْنَ(۶۱) وَ لَقَدْ عَلِمْتُمُ النَّشْاَةَ الْاُوْلٰى فَلَوْ لَا تَذَكَّرُوْنَ(۶۲) اَفَرَءَیْتُمْ مَّا تَحْرُثُوْنَؕ(۶۳) ءَاَنْتُمْ تَزْرَعُوْنَهٗۤ اَمْ نَحْنُ الزّٰرِعُوْنَ(۶۴) لَوْ نَشَآءُ لَجَعَلْنٰهُ حُطَامًا فَظَلْتُمْ تَفَكَّهُوْنَ(۶۵) اِنَّا لَمُغْرَمُوْنَۙ(۶۶) بَلْ نَحْنُ مَحْرُوْمُوْنَ(۶۷) اَفَرَءَیْتُمُ الْمَآءَ الَّذِیْ تَشْرَبُوْنَؕ(۶۸) ءَاَنْتُمْ اَنْزَلْتُمُوْهُ مِنَ الْمُزْنِ اَمْ نَحْنُ الْمُنْزِلُوْنَ(۶۹) لَوْ نَشَآءُ جَعَلْنٰهُ اُجَاجًا فَلَوْ لَا تَشْكُرُوْنَ(۷۰) اَفَرَءَیْتُمُ النَّارَ الَّتِیْ تُوْرُوْنَؕ(۷۱) ءَاَنْتُمْ اَنْشَاْتُمْ شَجَرَتَهَاۤ اَمْ نَحْنُ الْمُنْشِــٴُـوْنَ(۷۲) نَحْنُ جَعَلْنٰهَا تَذْكِرَةً وَّ مَتَاعًا لِّلْمُقْوِیْنَۚ(۷۳) فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظِیْمِ۠(۷۴) فَلَاۤ اُقْسِمُ بِمَوٰقِعِ النُّجُوْمِۙ(۷۵) وَ اِنَّهٗ لَقَسَمٌ لَّوْ تَعْلَمُوْنَ عَظِیْمٌۙ(۷۶) اِنَّهٗ لَقُرْاٰنٌ كَرِیْمٌۙ(۷۷) فِیْ كِتٰبٍ مَّكْنُوْنٍۙ(۷۸) لَّا یَمَسُّهٗۤ اِلَّا الْمُطَهَّرُوْنَؕ(۷۹) تَنْزِیْلٌ مِّنْ رَّبِّ الْعٰلَمِیْنَ(۸۰) اَفَبِهٰذَا الْحَدِیْثِ اَنْتُمْ مُّدْهِنُوْنَۙ(۸۱) وَ تَجْعَلُوْنَ رِزْقَكُمْ اَنَّكُمْ تُكَذِّبُوْنَ(۸۲) فَلَوْ لَاۤ اِذَا بَلَغَتِ الْحُلْقُوْمَۙ(۸۳) وَ اَنْتُمْ حِیْنَىٕذٍ تَنْظُرُوْنَۙ(۸۴) وَ نَحْنُ اَقْرَبُ اِلَیْهِ مِنْكُمْ وَ لٰكِنْ لَّا تُبْصِرُوْنَ(۸۵) فَلَوْ لَاۤ اِنْ كُنْتُمْ غَیْرَ مَدِیْنِیْنَۙ(۸۶) تَرْجِعُوْنَهَاۤ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِیْنَ(۸۷) فَاَمَّاۤ اِنْ كَانَ مِنَ الْمُقَرَّبِیْنَۙ(۸۸) فَرَوْحٌ وَّ رَیْحَانٌ وَّ جَنَّتُ نَعِیْمٍ(۸۹) 

وَ اَمَّاۤ اِنْ كَانَ مِنْ اَصْحٰبِ الْیَمِیْنِۙ(۹۰) فَسَلٰمٌ لَّكَ مِنْ اَصْحٰبِ الْیَمِیْنِؕ(۹۱) وَ اَمَّاۤ اِنْ كَانَ مِنَ الْمُكَذِّبِیْنَ الضَّآلِّیْنَۙ(۹۲) فَنُزُلٌ مِّنْ حَمِیْمٍۙ(۹۳) وَّ تَصْلِیَةُ جَحِیْمٍ(۹۴) اِنَّ هٰذَا لَهُوَ حَقُّ الْیَقِیْنِۚ(۹۵) فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظِیْمِ۠(۹۶)

Surah Waqiah in Hindi Tarjuma | सूरह वक़िया तर्जुमा

Surah Waqiah in Hindi Tarjuma हिंदी में आप सूरह वक़िया का Tarjuma (तर्जुमा) नीचे पढ़ सकते हैं :-

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है

Tarjuma (तर्जुमा): – 

1. इज़ा वक अतिल वाकिअह

उस वक़्त को याद करो जब क़यामत वाक़े हो जाएगी

2. लैसा लिवक अतिहा काज़िबह

जिस के वाक़े होने में कोई झूट नहीं

3. खाफिज़तुर राफि अह

किसी को नीचा करेगी और किसी को ऊंचा

4. इज़ा रुज्जतिल अरजु रज्जा

जब ज़मीन हिला कर रख दी जाएगी

5. व बुस्सतिल जिबालु बस्सा

और पहाड़ पीस कर रख दिए जायेंगे

6. फकानत हबा अम मुम्बस्सा

तो वो उड़ता हुआ गुबार बन जायेंगे

7. व कुन्तुम अजवाजन सलासह

और तुम तीन किस्मों में बंट जाओगे

8. फ अस्हाबुल मय्मनति मा अस्हाबुल मय्मनह

( एक ) तो दाहिनी तरफ़ वाले, क्या कहने दाहिनी तरफ़ वालों के

9. व अस्हाबुल मश अमति मा अस्हाबुल मश अमह

( दुसरे ) बायीं तरफ़ वाले, बायीं तरफ़ वाले कैसे बुरे हाल में होंगे

10. वस साबिकूनस साबिकून

( तीसरे ) आगे बढ़ जाने वाले, ( उन का क्या कहना ) वो तो आगे बढ़ जाने वाले हैं

11. उला इकल मुक़र्रबून

यही हैं जिनको अल्लाह से ख़ुसूसी नज़दीकी हासिल होगी

12. फ़ी जन्नातिन नईम

वो नेअमतों वाले बाग़ों में होंगे

13. सुल्लतुम मिनल अव्वलीन

उन का एक बड़ा गिरोह तो अगले लोगों में होगा

14. व क़लीलुम मिनल आखिरीन

और थोड़े से पिछले लोगों में होंगे

15. अला सुरुरिम मौजूनह

ऐसी मसेहरियों पर जो सोने से बुनी और जवाहरात से जड़ी होंगी

16. मुत्तकि ईना अलैहा मुतकाबिलीन

उन पर आमने सामने टेक लगाये हुए बैठे होंगे

17. यतूफु अलैहिम विल्दानुम मुखल्लदून

उन की ख़िदमत में ऐसे लड़के जो हमेशा लड़के ही रहेंगे वो उनके पास आते जाते रहेंगे

18. बिअक्वाबिव व अबारीका व कअ’सिम मिम मईन

ग्लासों और जगों में साफ़ सुथरी शराब के जाम लिए हुए

19. ला युसद्द ऊना अन्हा वला युन्ज़िफून

ऐसी शराब जिससे न उनके सर चकरायेंगे और न उनके होश उड़ेंगे

20. व फाकिहतिम मिम्मा यता खैयरून

और ऐसे मेवे लिए हुए जिनको वो खुद पसंद करेंगे

21. वलहमि तैरिम मिम्मा यश तहून

और ऐसे परिंदों का गोश्त लिए जिनकी उन्हें ख्वाहिश होगी

22. व हूरून ईन

और खूबसूरत आँखों वाली हूरें

23. कअम्सा लिल लुअ’लुइल मक्नून

जैसे छिपा छिपा कर रखे गए मोती

24. जज़ा अम बिमा कानू यअ’मलून

ये सब उनके कामों के बदले के तौर पर होगा जो वो किया करते थे

25. ला यस्मऊना फ़ीहा लग्वव वला तअसीमा

वो न उस में बेकार बातें सुनेंगे और न ही कोई गुनाह की बात

26. इल्ला कीलन सलामन सलामा

सिवाए सलामती ही सलामती की बात के

27. व अस्हाबुल यामीनि मा अस्हाबुल यमीन

और जो दायें तरफ वाले हैं, क्या खूब हैं दायें तरफ वाले

28. फ़ी सिदरिम मख्जूद

काँटों से पाक सिदरा के दरख्तों में

29. व तल्हिम मन्जूद

लदे हुए केले के पेड़ों में

30. व ज़िल्लिम मम्दूद

और फैले हुए साये में

31. वमा इम मस्कूब

और बहते हुए पानी में

32. व फाकिहतिन कसीरह

और बहुत से फलों में

33. ला मक़्तू अतिव वला ममनूअह

जो न ख़त्म होने को आयेंगे और न उन में कोई रोक टोक होगी

34. व फुरुशिम मरफूअह

और बलंद बिस्तरों में

35. इन्ना अनशअ नाहुन्ना इंशाआ

हम ने (उन के लिए) हूरें बनाई हैं

36. फज अल्नाहुन्ना अब्कारा

तो हम ने उनको कुंवारी बनाया है

37. उरुबन अतराबा

मुहब्बत भरी हमजोलियाँ

38. लि अस्हाबिल यमीन

ये है दायें तरफ वालों के लिए

39. सुल्लतुम मिनल अव्वलीन

उनकी एक बड़ी जमात अगले लोगों में है

40. वसुल्लतुम मिनल आखिरीन

उनकी एक बड़ी जमात पिछले लोगों में है

41. व अस्हाबुश शिमालि मा अस्हाबुश शिमाल

और बाएं तरफ वाले, क्या हाल होगा बाएं तरफ वालों का

42. फ़ी समूमिव व हमीम

वो होंगे झुलसा देने वाली हवा में और खौलते पानी में

43. व ज़िल्लिम मिय यहमूम

सियाह धुएं के साए में

44. ला बारिदिव वला करीम

जो न ठंडा होगा और न फायदा पहुँचाने वाला होगा

45. इन्नहुम कानू क़ब्ला ज़ालिका मुतरफीन

इस से पहले वो बड़े ऐशो इशरत में पड़े हुए थे

46. व कानू युसिर्रूना अलल हिन्सिल अज़ीम

और बड़े भारी गुनाह ( शिर्क ) पर अड़े रहते थे

47. व कानू यकूलूना अ इज़ा मितना व कुन्ना तुराबव व इज़ामन अ इन्ना लमब ऊसून

और कहा करते थे : जब हम मर जायेंगे और मिटटी हड्डी हो जायेंगे तो क्या हम फिर दोबारा जिंदा किये जायेंगे

48. अवा आबाउनल अव्वलून

और क्या हमारे पहले बाप दादा भी

49. कुल इन्नल अव्वलीना वल आखिरीन

कह दीजिये कि सब अगले और पिछले लोग

50. लमज मूऊना इला मीकाति यौमिम मालूम

एक मुक़र्ररह दिन पर ज़रूर इकठ्ठा किये जायेंगे

51. सुम्मा इन्नकुम अय्युहज़ ज़ाल्लूनल मुकज्ज़िबून

फिर ए गुमराहों और ए झुटलाने वालों ! यक़ीनन तुम

52. ल आकिलूना मिन शजरिम मिन ज़क्कूम

यक़ीनन ज़क्कूम के दरख़्त खाओगे

53. फ मालिऊना मिन्हल बुतून

और इसी से पेट भरोगे

54. फ शारिबूना अलैहि मिनल हमीम

फिर उस पर खौलता हुआ पानी पियोगे

55. फ शारिबूना शुरबल हीम

और पियोगे भी प्यासे ऊंटों की तरह

56. हाज़ा नुज़ुलुहुम यौमद दीन

क़यामत के दिन यही उन की मेहमान नवाज़ी होगी

57. नहनु खलक्नाकुम फलौला तुसद्दिकून

हम ने ही तुम को पैदा किया तो फिर तुम (दोबारा जिंदा किये जाने को) सच क्यूँ नहीं मानते हो ?

58. अफा रअय्तुम मा तुम्नून

भला देखो तो सही, जो मनी तुम (औरतों के रहम में) डालते हो

59. अ अन्तुम तख्लुकूनहु अम नहनुल खालिकून

उस को तुम इंसान बनाते हो या हम बनाने वाले हैं

60. नहनु क़द्दरना बय्नकुमुल मौता वमा नहनु बिमस्बूकीन

हम ने ही तुम्हारे लिए मरना तय किया है (कि हर शख्स पर मौत आती है) और हम उस बात से आजिज़ नहीं हैं

61. अला अन नुबददिला अम्सालकुम व नुन्शिअकुम फ़ी माला तअ’लमून

कि तुम्हारी जगह तुम्हारे जैसे किसी और को ले आयेंगे और तुम को वहां उठा खड़ा करेंगे, जिस का तुम को कोई भी इल्म नहीं

62. व लक़द अलिम्तुमुन नश अतल ऊला फलौला तज़क करून

और तुम तो पहली पैदाइश को जानते ही हो तो क्यूँ सबक़ नहीं लेते

63. अफा रअय्तुम मा तहरुसून

देखो तो सही कि तुम जो कुछ बोते हो

64. अ अन्तुम तजर उनहू अम नहनुज़ जारिऊन

उसको तुम उगाते हो या हम उगाते हो

65. लौ नशाऊ लजा अल्नाहु हुतामन फज़ल तुम तफक्कहून

अगर हम चाहें तो उसको रेज़ा रेज़ा कर डालें फिर तुम बातें बनाते रह जाओ

66. इन्ना ल मुगरमून

( तुम कहने लगो : ) कि हम पर तो तावान पड़ गया

67. बल नहनु महरूमून

बल्कि हम बड़े बदनसीब हैं

68. अफा रअय्तुमुल माअल्लज़ी तशरबून

फिर बताओ तो सही कि जिस पानी को तुम पीते हो

69. अ अन्तुम अन्ज़ल्तुमूहु मिनल मुज्नि अम नहनुल मुन्ज़िलून

उसको बादल से तुंम बरसाते हो या हम बरसाते हैं

70. वलौ नशाऊ ज अल्नाहू उजाजन फलौला तश्कुरून

अगर हम चाहें तो उसको खारा कर दें फिर तुम शुक्र क्यूँ नहीं करते

71. अफा रअय्तुमुन नारल लती तूरून

फिर देखो तो सही जो आग तुम सुलगाते हो

72. अ अन्तुम अनश’अतुम शजरतहा अम नहनुल मुन्शिऊन

उसके दरख़्त को तुम ने पैदा किया है या हम ने ?

73. नहनु जअल्नाहा तज्किरतव व मताअल लिल मुक्वीन

हम ने उसको याद दिहानी करने वाला और मुसाफिरों के लिए नफाबख्श बनाया है

74. फ़सब्बिह बिस्मि रब्बिकल अज़ीम

तो आप अपने अज़मत वाले परवरदिगार के नाम की पाकी बयान कीजिये

75. फला उक्सिमु बि मवाक़िइन नुजूम

तो अब मैं उन जगहों की क़सम खाकर कहता हूँ जहाँ सितारे गिरते हैं

76. व इन्नहू ल क़समुल लौ तअ’लमूना अज़ीम

और यक़ीनन अगर तुम जानो तो ये बहुत बड़ी क़सम है

77. इन्नहू लकुर आनून करीम

बेशक ये बड़ा ही काबिले एहतराम क़ुरान है

78. फ़ी किताबिम मक्नून

जो एक महफ़ूज़ किताब में पहले से मौजूद है

79. ला यमस्सुहू इल्लल मुतह हरून

इस को सिर्फ़ वही हाथ लगा सकता है जो खूब पाक साफ़ हो

80. तन्जीलुम मिर रब्बिल आलमीन

ये तमाम आलम के परवरदिगार की तरफ़ से उतारा हुआ है

81. अफा बिहाज़ल हदीसि अन्तुम मुद हिनून

क्या तुम इस कलाम के परवरदिगार का इनकार करते हो ?

82. व तज अलूना रिज्क़कुम अन्नकुम तुकज्ज़िबून

और इस के झुटलाने को ही अपना मशगला बना रखा है

83. फलौला इज़ा बला गतिल हुल्कूम

तो जब जान गले तक आ पहुँचती है

84. व अन्तुम ही नइजिन तन्ज़ुरून

और तुम उस वक़्त ( मरने वाले को ) देख रहे होते हो

85. व नहनु अकरबु इलैहि मिन्कुम वला किलला तुब्सिरून

और हम तुम से ज़्यादा उस से क़रीब हैं हालाँकि तुम नहीं देखते

86 फ़लौला इन कुन्तुम गैरा मदीनीन

अगर तुम किसी और के क़ाबू में नहीं हो तो

87. तर जिऊनहा इन कुन्तुम सदिकीन

तो उस जान को वापस नहीं क्यूँ नहीं ले आते अगर तुम सच्चे हो ?

88. फअम्मा इन कान मिनल मुक़र्रबीन

तो अगर मरने वाला खुदा के मुक़र्रिब बन्दों में से है

89. फ़ रौहुव व रैहानुव व जन्नतु नईम

तो (उस के लिए) आराम ही आराम, ख़ुशबू ही ख़ुशबू और नेअमत भरी जन्नत है

90. व अम्मा इन कान मिन अस्हाबिल यमीन

और अगर वो दाहिनी तरफ़ वालों में से है

91. फ़ सलामुल लका मिन अस्हाबिल यमीन

तो ( उस से कहा जायेगा तेरे लिए सलामती है कि तू दायें तरफ़ वालों में से है

92. व अम्मा इन कान मिनल मुकज्ज़िबीनज़ जाल लीन

और अगर वो झुटलाने वाले गुमराह लोगों में से था

93. फ नुज़ुलुम मिन हमीम

तो खौलते हुए पानी से मेज़बानी होगी

94. व तस्लियतु जहीम

और (उसे) दोज़ख़ में दाख़िल होना होगा

95. इन्ना हाज़ा लहुवा हक्कुल यक़ीन

बेशक ये यक़ीनी बात है

96. फ़ सब्बिह बिस्मि रब्बिकल अज़ीम

बस आप अपने रब के नाम की तस्बीह किये जाइए जो बड़ी अजमतों वाला है

Surah Waqiah in English Translation

Surah Waqiah in English Translation हिंदी में आप सूरह वक़िया का Tarjuma (तर्जुमा) नीचे पढ़ सकते हैं :-

In the name of Allah, Most Gracious, Most Merciful.

  1. When the Event inevitable cometh to pass,
  2. Then will no (soul) entertain falsehood concerning its coming.
  3. (Many) will it bring low; (many) will it exalt;
  4. When the earth shall be shaken to its depths,
  5. And the mountains shall be crumbled to atoms,
  6. Becoming dust scattered abroad,
  7. And ye shall be sorted out into three classes.
  8. Then (there will be) the Companions of the Right Hand;- What will be the Companions of the Right Hand?
  9. And the Companions of the Left Hand,- what will be the Companions of the Left Hand?
  10. And those Foremost (in Faith) will be Foremost (in the Hereafter).
  11. These will be those Nearest to Allah:
  12. In Gardens of Bliss:
  13. A number of people from those of old,
  14. And a few from those of later times.
  15. (They will be) on Thrones encrusted (with gold and precious stones),
  16. Reclining on them, facing each other.
  17. Round about them will (serve) youths of perpetual (freshness),
  18. With goblets, (shining) beakers, and cups (filled) out of clear-flowing fountains
  19. No after-ache will they receive therefrom, nor will they suffer intoxication:
  20. And with fruits, any that they may select:
  21. And the flesh of fowls, any that they may desire.
  22. And (there will be) Companions with beautiful, big, and lustrous eyes,-
  23. Like unto Pearls well-guarded.
  24. A Reward for the deeds of their past (life).
  25. Not frivolity will they hear therein, nor any taint of ill,-
  26. Only the saying, “Peace! Peace”.
  27. The Companions of the Right Hand,- what will be the Companions of the Right Hand?
  28. (They will be) among Lote-trees without thorns,
  29. Among Talh trees with flowers (or fruits) piled one above another,-
  30. In shade long-extended,
  31. By water flowing constantly,
  32. And fruit in abundance.
  33. Whose season is not limited, nor (supply) forbidden,
  34. And on Thrones (of Dignity), raised high.
  35. We have created (their Companions) of special creation.
  36. And made them virgin – pure (and undefiled), –
  37. Beloved (by nature), equal in age,-
  38. For the Companions of the Right Hand.
  39. A (goodly) number from those of old,
  40. And a (goodly) number from those of later times.
  41. The Companions of the Left Hand,- what will be the Companions of the Left Hand?
  42. (They will be) in the midst of a Fierce Blast of Fire and in Boiling Water,
  43. And in the shades of Black Smoke:
  44. Nothing (will there be) to refresh, nor to please:
  45. For that they were wont to be indulged, before that, in wealth (and luxury),
  46. And persisted obstinately in wickedness supreme!
  47. And they used to say, “What! when we die and become dust and bones, shall we then indeed be raised up again?-
  48. “(We) and our fathers of old?”
  49. Say: “Yea, those of old and those of later times,
  50. “All will certainly be gathered together for the meeting appointed for a Day well-known.
  51. “Then will ye truly,- O ye that go wrong, and treat (Truth) as Falsehood!-
  52. “Ye will surely taste of the Tree of Zaqqum.
  53. “Then will ye fill your insides therewith,
  54. “And drink Boiling Water on top of it:
  55. “Indeed ye shall drink like diseased camels raging with thirst!”
  56. Such will be their entertainment on the Day of Requital!
  57. It is We Who have created you: why will ye not witness the Truth?
  58. Do ye then see?- The (human Seed) that ye throw out,-
  59. Is it ye who create it, or are We the Creators?
  60. We have decreed Death to be your common lot, and We are not to be frustrated
  61. from changing your Forms and creating you (again) in (forms) that ye know not.
  62. And ye certainly know already the first form of creation: why then do ye not celebrate His praises?
  63. See ye the seed that ye sow in the ground?
  64. Is it ye that cause it to grow, or are We the Cause?
  65. Were it Our Will, We could crumble it to dry powder, and ye would be left in wonderment,
  66. (Saying), “We are indeed left with debts (for nothing):
  67. “Indeed are we shut out (of the fruits of our labour)”
  68. See ye the water which ye drink?
  69. Do ye bring it down (in rain) from the cloud or do We?
  70. Were it Our Will, We could make it salt (and unpalatable): then why do ye not give thanks?
  71. See ye the Fire which ye kindle?
  72. Is it ye who grow the tree which feeds the fire, or do We grow it?
  73. We have made it a memorial (of Our handiwork), and an article of comfort and convenience for the denizens of deserts.
  74. Then celebrate with praises the name of thy Lord, the Supreme!
  75. Furthermore I call to witness the setting of the Stars,-
  76. And that is indeed a mighty adjuration if ye but knew,-
  77. That this is indeed a qur´an Most Honourable,
  78. In Book well-guarded,
  79. Which none shall touch but those who are clean:
  80. A Revelation from the Lord of the Worlds.
  81. Is it such a Message that ye would hold in light esteem?
  82. And have ye made it your livelihood that ye should declare it false?
  83. Then why do ye not (intervene) when (the soul of the dying man) reaches the throat,-
  84. And ye the while (sit) looking on,-
  85. But We are nearer to him than ye, and yet see not,-
  86. Then why do ye not,- If you are exempt from (future) account,-
  87. Call back the soul, if ye are true (in the claim of independence)?
  88. Thus, then, if he be of those Nearest to Allah,
  89. (There is for him) Rest and Satisfaction, and a Garden of Delights.
  90. And if he be of the Companions of the Right Hand,
  91. (For him is the salutation), “Peace be unto thee”, from the Companions of the Right Hand.
  92. And if he be of those who treat (Truth) as Falsehood, who go wrong,
  93. For him is Entertainment with Boiling Water.
  94. And burning in Hell-Fire.
  95. Verily, this is the Very Truth and Certainly.
  96. So celebrate with praises the name of thy Lord, the Supreme. (Surah Waqiah)

Surah Waqiah in Roman English Text Transliteration

Surah Waqiah in Roman English Text Transliteration में आप सूरह वक़िया का Roman English Text Transliteration नीचे पढ़ सकते हैं :-

Bismillaahir Rahmaanir Raheem

  1. Izaa waqa’atil waaqi’ah
  2. Laisa liwaq’atihaa kaazibah
  3. Khafidatur raafi’ah
  4. Izaa rujjatil ardu rajjaa
  5. Wa bussatil jibaalu bassaa
  6. Fakaanat habaaa’am mumbassaa
  7. Wa kuntum azwaajan salaasah
  8. Fa as haabul maimanati maaa as haabul maimanah
  9. Wa as haabul mash’amati maaa as haabul mash’amah
  10. Wassaabiqoonas saabiqoon
  11. Ulaaa’ikal muqarraboon
  12. Fee Jannaatin Na’eem
  13. Sullatum minal awwaleen
  14. Wa qaleelum minal aa khireen
  15. ‘Alaa sururim mawdoonah
  16. Muttaki’eena ‘alaihaa mutaqabileen
  17. Yatoofu ‘alaihim wildaa num mukhalladoon
  18. Bi akwaabinw wa abaareeq, wa kaasim mim ma’een
  19. Laa yusadda’oona ‘anhaa wa laa yunzifoon
  20. Wa faakihatim mimmaa yatakhaiyaroon
  21. Wa lahmi tairim mimmaa yashtahoon
  22. Wa hoorun’een
  23. Ka amsaalil lu’lu’il maknoon
  24. Jazaaa’am bimaa kaanoo ya’maloon
  25. Laa yasma’oona feehaa laghwanw wa laa taaseemaa
  26. Illaa qeelan salaaman salaamaa
  27. Wa as haabul yameeni maaa as haabul Yameen
  28. Fee sidrim makhdood
  29. Wa talhim mandood
  30. Wa zillim mamdood
  31. Wa maaa’im maskoob
  32. Wa faakihatin kaseerah
  33. Laa maqtoo’atinw wa laa mamnoo’ah
  34. Wa furushim marfoo’ah
  35. Innaaa anshaanaahunna inshaaa’aa
  36. Faja’alnaahunna abkaaraa
  37. ‘Uruban atraabaa
  38. Li as haabil yameen
  39. Sullatum minal awwa leen
  40. Wa sullatum minal aakhireen
  41. Wa as haabush shimaali maaa as haabush shimaal
  42. Fee samoominw wa hameem
  43. Wa zillim miny yahmoom
  44. Laa baaridinw wa laa kareem
  45. Innahum kaanoo qabla zaalika mutrafeen
  46. Wa kaanoo yusirroona ‘alal hinsil ‘azeem
  47. Wa kaanoo yaqooloona a’izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa izaaman’ainnaa lamab’oosoon
  48. Awa aabaaa’unal awwaloon
  49. Qul innal awwaleena wal aakhireen
  50. Lamajmoo’oona ilaa meeqaati yawmim ma’loom
  51. summa innakum ayyuhad daaalloonal mukazziboon
  52. La aakiloona min shaja rim min zaqqoom
  53. Famaali’oona minhal butoon
  54. Fashaariboona ‘alaihi minal hameem
  55. Fashaariboona shurbal heem
  56. Haazaa nuzuluhum yawmad deen
  57. Nahnu khalaqnaakum falaw laa tusaddiqoon
  58. Afara’aytum maa tumnoon
  59. ‘A-antum takhluqoo nahooo am nahnul khaaliqoon
  60. Nahnu qaddarnaa baina kumul mawta wa maa nahnu bimasbooqeen
  61. ‘Alaaa an nubaddila amsaalakum wa nunshi’akum fee maa laa ta’lamoon
  62. Wa laqad ‘alimtumun nash atal oolaa falaw laa tazakkaroon
  63. Afara’aytum maa tahrusoon
  64. ‘A-antum tazra’oonahooo am nahnuz zaari’ooon
  65. Law nashaaa’u laja’al naahu hutaaman fazaltum tafakkahoon
  66. Innaa lamughramoon
  67. Bal nahnu mahroomoon
  68. Afara’aytumul maaa’allazee tashraboon
  69. ‘A-antum anzaltumoohu minal muzni am nahnul munziloon
  70. Law nashaaa’u ja’alnaahu ujaajan falaw laa tashkuroon
  71. Afara’aytumun naaral latee tooroon
  72. ‘A-antum anshaatum shajaratahaaa am nahnul munshi’oon
  73. Nahnu ja’alnaahaa tazkira tanw wa mataa’al lilmuqween
  74. Fasabbih bismi Rabbikal ‘azeem
  75. Falaa uqsimu bimaawaa qi’innujoom
  76. Wa innahoo laqasamul lawta’lamoona’azeem
  77. Innahoo la quraanun kareem
  78. Fee kitaabim maknoon
  79. Laa yamassuhooo illal mutahharoon
  80. Tanzeelum mir Rabbil’aalameen
  81. Afabihaazal hadeesi antum mudhinoon
  82. Wa taj’aloona rizqakum annakum tukazziboon
  83. Falaw laaa izaa balaghatil hulqoom
  84. Wa antum heena’izin tanzuroon
  85. Wa nahnu aqrabu ilaihi minkum wa laakil laa tubsiroon
  86. Falaw laaa in kuntum ghaira madeeneen
  87. Tarji’oonahaaa in kuntum saadiqeen
  88. Fa ammaaa in kaana minal muqarrabeen
  89. Farawhunw wa raihaa nunw wa jannatu na’eem
  90. Wa ammaaa in kaana min as haabil yameen
  91. Fasalaamul laka min as haabil yameen
  92. Wa ammaaa in kaana minal mukazzibeenad daaalleen
  93. Fanuzulum min hameem
  94. Wa tasliyatu jaheem
  95. Inna haaza lahuwa haqqul yaqeen
  96. Fasabbih bismi rabbikal ‘azeem

Surah Waqiah in Urdu Translation| सूरह वक़िया उर्दू में

यहां हमने Surah Waqiah in Urdu बताया है जहां आप सूरह वक़िया को Urdu में पढ़ सकते हैं और याद कर सकते हैं और ढेर सारी ने किया कमा सकते हैं सो नीचे दिए गए सूरह वक़िया उर्दू को आप Urdu में पढ़ सकते हैं

  1. وہ وقت یاد رکھیں جب قیامت واقع ہو گی۔
  2. اس کے ہونے میں کوئی جھوٹ نہیں ہے۔
  3. کسی کو نیچا کر دے گا اور کسی کو بلند کرے گا۔
  4. جب زمین ہل جائے گی۔
  5. اور پہاڑ ریزہ ریزہ ہو جائیں گے۔
  6. پھر وہ اڑنے والے بادل بن جائیں گے۔
  7. اور آپ کو تین قسموں میں تقسیم کیا جائے گا۔
  8. (1) تو دائیں طرف والوں کے بارے میں کیا کہا جائے؟
  9. (دوسرا) بائیں طرف والے، بائیں طرف والے کتنے برے ہوں گے؟
  10. (تیسری بات) وہ جو آگے بڑھنے والے ہیں، (ان کے بارے میں) وہ آگے بڑھنے والے ہیں۔
  11. یہ وہ لوگ ہیں جو اللہ کا خاص قرب حاصل کریں گے۔
  12. وہ نعمتوں کے باغوں میں ہوں گے۔
  13. اگلے لوگوں میں ان کا ایک بڑا گروہ ہوگا۔
  14. اور چند آخری لوگوں میں سے ہوں گے۔
  15. ایسے دھاگوں پر جو سونے کے بنے ہوں گے اور جواہرات سے جڑے ہوں گے۔
  16. ایک دوسرے کے سامنے ان پر ٹیک لگائے بیٹھے ہوں گے۔

17۔ اس کی خدمت میں ایسے لڑکے جو ہمیشہ لڑکے ہی رہیں گے اس کے پاس آتے رہیں گے۔

  1. شراب کے صاف شیشے لے جانے والے شیشے اور جگ
  2. ایسی شراب جس سے نہ انہیں چکر آئے اور نہ ہی ان کے حواس ختم ہوں۔
  3. اور گری دار میوے کے ساتھ جو وہ خود پسند کرے گا۔
  4. اور پرندوں کا گوشت جس طرح چاہیں لے لو۔
  5. اور خوبصورت آنکھوں والی خوبصورتیاں
  6. چھپے ہوئے موتیوں کی طرح
  7. یہ سب کچھ اس کے بدلے میں ہوگا جو وہ کیا کرتے تھے۔
  8. وہ اس میں نہ کوئی فضول بات سنیں گے اور نہ کوئی گناہ کی بات۔
  9. سوائے حفاظت اور سلامتی کے
  10. اور دائیں طرف والے، دائیں طرف والے کتنے شاندار ہیں۔
  11. پاک سدرہ کے درختوں میں کانٹوں کے ساتھ
  12. بھرے ہوئے کیلے کے درختوں میں
  13. اور پھیلتے ہوئے سائے میں
  14. اور بہتے پانی میں
  15. اور بہت سے پھلوں میں سے
  16. جو کبھی ختم نہ ہوں گے اور ان میں کوئی پابندی نہیں ہوگی۔
  17. اور اونچے بستروں میں
  18. ہم نے (انہیں) ہیرو بنایا ہے۔
  19. پس ہم نے انہیں کنواری بنا دیا۔
  20. محبت کرنے والے ساتھی
  21. یہ حق والوں کے لیے ہے۔
  22. ان کا ایک بڑا گروہ اگلے لوگوں میں شامل ہے۔
  23. ان کا ایک بڑا گروہ آخری لوگوں میں سے ہے۔
  24. اور بائیں طرف والے، بائیں طرف والوں کا کیا حال ہو گا؟
  25. وہ چلچلاتی ہوا اور کھولتے ہوئے پانی میں ہوں گے۔
  26. کالے دھوئیں کے سائے میں
  27. جو نہ ٹھنڈا ہو گا اور نہ فائدہ مند ہو گا۔
  28. اس سے پہلے وہ بڑی عیش و عشرت میں زندگی گزار رہے تھے۔
  29. ​​اور وہ کبیرہ گناہوں (شرک) پر اڑے رہے۔
  30. اور کہتے تھے: کیا جب ہم مر جائیں گے اور مٹی اور ہڈیاں ہو جائیں گے تو کیا ہم دوبارہ زندہ کیے جائیں گے؟
  31. اور ہمارے آباؤ اجداد کے بارے میں بھی کیا خیال ہے؟
  32. تمام اگلے اور پچھلے لوگوں کو بتائیں
  33. ایک مقررہ دن میں ضرور جمع کیے جائیں گے۔
  34. پھر اے گمراہ اور جھٹلانے والو! یقیناً آپ
  35. تم ضرور زکم کے درخت کھاؤ گے۔
  36. اور اس سے تمہارا پیٹ بھر جائے گا۔
  37. پھر اس پر پانی کھول کر پی لیں۔
  38. اور تم بھی پیاسے اونٹوں کی طرح پیو گے۔
  39. یہ قیامت کے دن ان کی مہمان نوازی ہوگی۔
  40. ہم نے تمہیں پیدا کیا ہے پھر تم (دوبارہ زندہ کیے جانے) کو سچا کیوں نہیں مانتے؟
  41. (خواتین کے رحم و کرم پر) خرچ کرنے والے مال کو دیکھو۔
  42. کیا آپ اسے انسان بناتے ہیں یا ہم اسے بنانے جا رہے ہیں؟
  43. ہم نے تمہارے لیے موت کا فیصلہ کر رکھا ہے (کہ موت ہر شخص کو آتی ہے) اور ہم اس سے مطمئن نہیں ہیں۔
  44. کہ وہ آپ کی جگہ آپ جیسے کسی اور کو لائیں گے اور آپ کو ایسی جگہ پر فائز کریں گے جس کے بارے میں آپ کو کوئی علم نہیں۔
  45. اور تم پہلے پیدا ہونے والے کو جانتے ہو، تو تم سبق کیوں نہیں سیکھتے؟
  46. محتاط رہیں کہ آپ کیا بوتے ہیں۔
  47. کیا آپ اسے اگاتے ہیں یا ہم اسے اگاتے ہیں؟
  48. اگر ہم چاہیں تو اسے ٹکڑے ٹکڑے کر سکتے ہیں اور پھر آپ بات کرتے رہیں۔
  49. (آپ کہنے لگیں:) کہ ہم پر طوفان آگیا ہے۔
  50. بلکہ ہم بہت بدقسمت ہیں۔
  51. پھر بتاؤ جو پانی تم پیتے ہو؟
  52. کیا آپ بادلوں سے بارش کرتے ہیں یا ہم اسے برساتے ہیں؟
  53. اگر ہم چاہیں تو اسے نمکین بنا سکتے ہیں، پھر تم شکر کیوں نہیں کرتے؟
  54. پھر اس آگ کو دیکھو جس کو تم جلاتے ہو۔
  55. کیا آپ نے اس کا درخت بنایا یا ہم نے بنایا؟
  56. ہم نے اسے مسافروں کے لیے نصیحت اور نعمت بنایا ہے۔
  57. پھر اپنے سب سے بلند رب کا نام پڑھیں۔
  58. اب میں ان جگہوں کی قسم کھاتا ہوں جہاں ستارے گرتے ہیں۔
  59. اور اگر تم جانتے ہو تو یہ بہت بڑی قسم ہے۔
  60. بے شک یہ بہت ہی قابل احترام قرآن ہے۔
  61. جو پہلے سے محفوظ کتاب میں موجود ہے۔

79۔ صرف وہی ہاتھ چھو سکتا ہے جو بہت صاف ہو۔

  1. یہ تمام مخلوقات کے رب کی طرف سے نازل کیا گیا ہے۔
  2. کیا آپ اس کلام کے رب کا انکار کرتے ہیں؟
  3. اور ہم نے انکار کو اپنا اصل مشغلہ بنا لیا ہے۔
  4. تو جب زندگی حلق تک پہنچتی ہے۔
  5. اور اس وقت تم (مرنے والے کو) دیکھ رہے ہو
  6. اور ہم تم سے زیادہ اس کے قریب ہیں، حالانکہ تم دیکھتے نہیں ہو۔
  7. اگر آپ کسی اور کے کنٹرول میں نہیں ہیں تو پھر
  8. اگر تم سچے ہو تو اس روح کو واپس کیوں نہیں لاتے؟
  9. پس اگر مرنے والا خدا کے بندوں میں سے ہے
  10. پس (اس کے لیے) راحت سکون ہے، خوشبو خوشبو ہے اور جنت نعمتوں سے بھری ہوئی ہے۔
  11. اور اگر وہ حق والوں میں سے ہو۔
  12. پھر (اس سے کہا جائے گا) تم پر سلامتی ہو کہ تم دائیں طرف والوں میں سے ہو۔
  13. اور اگر وہ ان گمراہ لوگوں میں سے ہوتا جو جھٹلاتے ہیں۔
  14. پھر اسے کھولتے ہوئے پانی کے ساتھ میزبانی کی جائے گی۔
  15. اور (اسے) جہنم میں داخل ہونا پڑے گا۔
  16. یقیناً یہ ایک یقینی بات ہے۔
  17. بس اپنے رب کے نام کی تسبیح کرو جو بڑے عجائبات والا ہے۔

Surah Waqiah Ki Fazilat | सूरह वक़िया की फ़ज़ीलत

हुज़ूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि जो शख़्स Surah Waqiah (सूरह वक़िया) की तिलावत करेगा उसे ग़ुर्बत नहीं होगी। जो शख़्स सूरत अल वाकिया की तिलावत करता रहेगा क़ियामत के दिन उस का चेहरा चमकदार होगा

  1. मुतअद्दिद अहादीस इस बात पर रोशनी डालती हैं कि इस से माली इस्तिहकाम आता है
  2. इस सूरत के पढ़ने से इन्सान की ज़िंदगी में बरकतें और ख़ुशीयां आती हैं
  3. ये कामयाबी और ख़ुशहाली को बढ़ाने में मदद करता है
  4. सूरह वक़िया पढ़ने से अल्लाह के क़रीब हो जाता है

हज़रत मुहम्मद (SAW) ने कहा कि:

“जो कोई हर रात सूरह अल-वक़िया पढ़ता है, वह कभी गरीबी से पीड़ित नहीं होगा।” (शुआब अल-ईमान 4/120, संख्या 2269)।

पैगंबर मुहम्मद (SAW) द्वारा हर रात इस सूरह को पढ़ने की सलाह दी जाती है। कोई भी व्यक्ति सोने से पहले या मग़रिब और ईशा की नमाज़ के बीच सूरह वक़िया पढ़ सकता है।

यह पवित्र कुरान का 27वां पैरा 56वां अध्याय है।

For Reading Surah Waqiah Benefits | सूरह वक़िया पढ़ने के फायदे

इन दिनों, ज़्यादा-तर लोग परेशानीयों और तनाव से भरी ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं। इस तनाव में से ज़्यादा-तर मआशी अवामिल की वजह से पैदा होता है जहां लोग अपने ख़ानदानों को फ़राहम करने के काबिल होने के बारे में फ़िक्रमंद होते हैं।

क़ुरआन ऐसी आयात और सूरतों से भरा हुआ है जो हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सिर्फ तिलावत करने से हमारी ज़िंदगीयों में बरकतें और बरकतें लाती हैं। खासतौर पर Surah Waqiah (सूरह वक़िया) को तमाम मुस्लमानों के लिए एक नेअमत कहा जाता है क्योंकि आपकी माली ज़िंदगी में इस के वसीअ फ़वाइद हैं।

आम तौर पर “दौलत की सूरा के तौर पर कहा जाता है, Surah Waqiah आपको ग़ुर्बत से बचाते हुए फ़रावानी और ख़ुशहाली लाती है। इस को पढ़ने के लिए अपने दिन में से कुछ मिनट निकालना इस बात को यक़ीनी बनाता है कि आप इस से ला-महदूद इनामात हासिल करें।

Surah Waqiah (सूरह वक़िया) की तिलावत के बेहतरीन वक़्त

Surah Waqiah को पढ़ने में 5 मिनट से ज़्यादा वक़्त नहीं लगता, इसलिए आम आदमी के लिए उसे अपने मामूलात में फिट करना बहुत आसान है। नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उम्मत को हर रात उसे पढ़ने की तलक़ीन फ़रमाई। आप अपनी पसंद के मुताबिक़ इसे मग़रिब और इशा की नमाज़ों के दरमयान या इशा के बाद सोने से पहले पढ़ सकते हैं।

Download Surah Waqiah PDF | सूरह वक़िया PDF

जो लोग Surah Waqiah PDF Download करना चाहते हैं आपको नीचे दिए गए डाउनलोड बटन पर क्लिक करना है और सूरह वक़िया PDF फाइल उस लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं।

आप सूरह वक़िया बारे में अधिक जान सकते हैं click here

‘OR’

कौन सा सूरह रिज़्क के लिए है?

Surah Waqiah (सूरह वक़िया), जिसे “दौलत की सूरा भी कहा जाता है, कसरत और कामयाबी लाते हुए आपको ग़ुर्बत से बचाती है। हर-रोज़ मुख़्तसर वक़्त के लिए उस का विर्द करना यक़ीनी बनाएगा कि आप उस के लामहदूद फ़वाइद से मुस्तफ़ीद होंगे।


सूरह वक़िया को 3 बार पढ़ने के क्या फायदे हैं?

अगर कोई शख़्स एक ही जगह पर बैठ कर तीन मर्तबा Surah Waqiah (सूरह वक़िया) पढ़े तो अल्लाह ताला ख़ुशकसाली को दूर करता है और बारिश होती है। सूरा विकेअह की तिलावत से साबित होता है कि अल्लाह ताला बेहतरीन रिज़्क़ देने वाला है और अल्लाह ताला हर मुश्किल का हल क़ुरान-ए-पाक में देता है

पैगंबर ने सूरह वक़िया के बारे में क्या कहा?

अबदुल्लाह बिन मसऊद रज़ी अल्लाह अन्ना से रिवायत है कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया ”जो शख़्स हर रात Surah Waqiah (सूरह वक़िया) तिलावत करेगा, उसे कभी ग़ुर्बत नहीं होगी


क्या मैं फज्र के बाद Surah Waqiah (सूरह वक़िया) पढ़ सकता हूँ?

फ़ज्र की नमाज़ और तुलू-ए-आफ़्ताब के दरमयान में Surah Waqiah (सूरह वक़िया) पढ़ी जा सकती है। रात की नमाज़ में पढ़ा जा सकता है। जुमा के दिन अल्लाह-तआला से रिज़्क़ हासिल करने के लिए क़ुरआन-ए-मजीद की आयात पढ़ने की नीयत से पढ़ा जा सकता है

Surah Waqiah (सूरह वक़िया) को किस नाम से भी जाना जाता है?

Surah Waqiah (सूरह वक़िया) का मतलब है ‘नागुज़ीर या ‘वाक़िया’। सूरह वक़िया क़ुरआन-ए-मजीद की56वीं सूरत है जो मक्का में नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाज़िल हुई इसी लिए उसे मक्की सूरा कहा जाता है

आज आपने क्या सीखा

तो दोस्तों अभी आप ने सूरह वक़िया क्या है ,सूरह वक़िया की फ़ज़ीलत और सूरह वक़िया का तर्जुमा| इसके बारे में विस्तार से जाना है|

दोस्तों सूरह वक़िया के पढ़ने के कई सारे फायदे हैं इतने कि आप सोच भी नहीं सकते हैं और ऐसे ही Dua e Qunoot (दुआ ए क़ुनूत) पढ़ने के भी कई सारे फायदे हैं और अगर आप पढ़ना चाहते हैं तो क्लिक करें|

आप इस Dua को पढ़कर दुनिया और आखिरत में फायदा उठाएं|आपको हमारा ये आर्टिकल सूरह वक़िया in Hindi  कैसी लगी अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें ।

अगर आपको इस आर्टिकल सूरह वक़िया इन हिंदी से जुड़े कोई भी सवाल है तो जरूर पूछें और इसी तरह जानकारी पाने के लिए हमें फॉलो करना ना भूलें।

इसे अपने दोस्तों और रिस्तेदार के साथ शेयर जरूर करे ताकि वो भी इस जानकारी से मुतालिल हो सके ।

1 thought on “Surah Waqiah Read Online in English with PDF Download 2023”

Leave a comment