Panchwa Kalma Astaghfar | Free PDF Download 2023

Bismillahir Rahmanir Raheem, Assalamu’alaikum Warahmatullahi Wabarakatuh, In this article I will provide you Panchwa Kalma Astaghfar (पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र) in Hindi, English, Arabic, Urdu with Tarjuma.

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KalmaKalma Ka NaamKalma Ka Meaning
1. Pehla Kalmaतय्यबपाकी
2. Dusra Kalmaशहादतगवाही देना
3. Teesra Kalmaतमजीदबुजुरगी
4. Chautha Kalmaतौहीदअकेला
5. Panchwa Kalmaअस्तगफारतौबा करना
6. Chata Kalmaरददे कुफ्रविश्वासघात से पीछे हटना

No. of 6 Kalma Table

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Panchwa Kalma Astaghfar in Hindi (पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र हिंदी में)

"अस्तग़-फिरुल्ला-ह रब्बी मिन कुल्लि जाम्बिन अज-नब-तुहु अ-म-द-न अव् ख-त-अन सिर्रन औ अलानियतंव् व अतूवु इलैहि मिनज-जम्बिल-लजी ला अ-अलमु इन्-न-क अन्-त अल्लामुल गुयूबी व् सत्तारुल उवूबि व् गफ्फा-रुज्जुनुबि वाला हो-ल वला कुव्-व-त इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यील अजीम।"

Panchwa Kalma Astaghfar in Arabic (अरबी में पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र)

اَسْتَغْفِرُ اللهَ رَبِّىْ مِنْ كُلِّ ذَنْبٍ اَذْنَبْتُهٗ عَمَدًا اَوْ خَطَا ًٔ سِرًّا اَوْ عَلَانِيَةً وَّاَتُوْبُ اِلَيْهِ مِنَ الذَّنْبِ الَّذِیْٓ اَعْلَمُ وَ مِنَ الذَّنْبِ الَّذِىْ لَآ اَعْلَمُ اِنَّكَ اَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوْبِ وَ سَتَّارُ الْعُيُوْبِ و َغَفَّارُ الذُّنُوْبِ وَ لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ اِلَّا بِاللهِ الْعَلِىِّ الْعَظِيْمِ

Panchwa Kalma Astaghfar in English (अंग्रेजी में पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र)

"Astag Firu llaha Rabbi Min Kulli Zham Bin Ajanab Tuhu Amadan Au Khata an Sirran Au Alaniyyatau Wa Atubu Ilayhi Minaz Zam Billazi Alamu Wa Minaz Zambillazi La Alamu Innaka Anta Allmul Ghuyubi Wa Sattarul Uyubi Wa Ghaffaruz Zhunoobi Wa La Haula Wa La Quwwata Illa Billahil Ali Yil Azeem."

Panchwa Kalma Astaghfar in Urdu (उर्दू में पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र)

استغفر اللہ ربی من کُلّی ثم بن عجنب تہو امدان او خطا عن سیراں عن الانیہ و اطوب الٰہی مناز زم بلازی عالمو و من زمبیلزی لا عالم اناکا انت آلم الغیوبی و ستار العیوبی و غفارو ذو الذو الذی الذی لا یؤلوا الذی لا یعلمون۔ عظیم۔

Panchwa Kalma Astaghfar with Tarjuma (तर्जुमा के साथ पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र)

"मै अपने परवरदिगार (अल्लाह) से अपने तमाम गुनाहो कि माफ़ी मांगता हुँ जो मैंने जान-बूझकर किये या भूल कर किये, छिप कर किये या खुल्लम खुल्ला किये और तौबा करता हु मैं उस गुनाह से, जो मैं जनता हु और उस गुनाह से जो मैं नहीं जानता. या अल्लाह बेशक़ तू गैब कि बाते जानने वाला और ऐबों को छिपाने वाला है और गुनाहो को बख्शने वाला है और (हम मे) गुनाहो से बचने और नेकी करने कि ताक़त नहीं अल्लाह के बगैर जो के बोहोत बुलंद वाला है।"

"I seek forgiveness from Allah, my Lord, from every sin I committed knowingly or unknowingly, secretly or openly, and I turn towards Him from the sin that I know and from the sin that I do not know. Certainly You, You (are) the knower of the hidden things and the Concealer (of) the mistakes and the Forgiver (of) the sins. And (there is) no power and no strength except from Allah, the Most High, the Most Great."

میں اپنے رب سے اپنے ان تمام گناہوں کی بخشش مانگتا ہوں جو میں نے جان بوجھ کر یا بھول کر، چھپ کر یا کھلے عام کیے ہوں، اور میں ان گناہوں سے توبہ کرتا ہوں جو میں جانتا ہوں اور جن کو میں نہیں جانتا، اے اللہ، بے شک تو ہی ہے۔ غیب کا جاننے والا اور عیبوں کو چھپانے والا اور گناہوں کو معاف کرنے والا اور (ہم) گناہوں سے بچنے اور نیک اعمال کرنے کی طاقت نہیں رکھتے سوائے اللہ کے جو سب سے بلند ہے۔

Panchwa Kalma Astaghfar (पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र) क्या है?

“पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र” एक इस्लामी वज़ीफ़ा (धार्मिक उद्यम) है जिसे मुस्लिम समुदाय में अपने गुनाहों की माफ़ी मांगने के लिए पढ़ते हैं। इसे आमतौर पर “अस्तग़फ़र” के नाम से भी जाना जाता है, जिसका मतलब होता है – “माफ़ी मांगना” या “क्षमा प्राप्ति करना”। यह धार्मिक प्रथा बड़े पैमाने पर इस्लामी विश्व में प्रचलित है।

पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र का मतलब निम्नलिखित होता है:

اَسْتَغْفِرُ اللهَ رَبِّىْ مِنْ كُلِّ ذَنْبٍ اَذْنَبْتُهٗ عَمَدًا اَوْ خَطَا ًٔ سِرًّا اَوْ عَلَانِيَةً وَّاَتُوْبُ اِلَيْهِ مِنَ الذَّنْبِ الَّذِیْٓ اَعْلَمُ وَ مِنَ الذَّنْبِ الَّذِىْ لَآ اَعْلَمُ اِنَّكَ اَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوْبِ وَ سَتَّارُ الْعُيُوْبِ و َغَفَّارُ الذُّنُوْبِ وَ لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ اِلَّا بِاللهِ الْعَلِىِّ الْعَظِيْمِ

यह वाक्यांश अरबी में है और इसका हिन्दी अनुवाद लगभग निम्नलिखित होता है:

“मैं अपने हर क़दम पर अपने ख़तियाओं की माफी मांगता हूँ, जो मैंने जानबूझकर या बिना जानकर, गुप्त रूप में या सार्वजनिक रूप में किया हो, और मैं उसकी तरफ फिरता हूँ जिनमें से मुझे ज्ञात है और जिनमें से मुझे नहीं पता। हे अल्लाह, मैं तुझसे यहाँ वह बातें नहीं करता कि मैं तुझे किसी को शरीक बनाऊँ जबकि मेरे पास इसकी जानकारी है, और मैं तुझसे उसकी माफी मांगता हूँ जिसकी मुझे जानकारी नहीं।”

यह दुआ इस्लामी आदत के अनुसार गुनाहों की माफी के लिए पढ़ी जाती है और माना जाता है कि इसके पठन से व्यक्ति के गुनाह माफ हो जाते हैं। यह अल्लाह से क्षमा प्राप्ति की प्रार्थना का हिस्सा है और अपने आप को सुधारने का आदान-प्रादान करने का तरीका है।

Panchwa Kalma Astaghfar (पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र) कैसे पढ़ा जाता है?

“पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र” को अरबी में पढ़ा जाता है और यह इस्लामी धार्मिक प्रथा का हिस्सा है। यहां एक मान्यता से दिखाया गया है कि कैसे इस कलमा को पढ़ा जाता है:

  1. पहले तो आपको वुजू करके (वजू की तहरीर की गई नियत से धोने की प्रक्रिया) शुद्धता प्राप्त करनी चाहिए।
  2. फिर, आपको “पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र” का पठन करना होगा। निम्नलिखित है उसका अरबी मात्रा और हिन्दी अनुवाद:
اَسْتَغْفِرُ اللهَ رَبِّىْ مِنْ كُلِّ ذَنْبٍ اَذْنَبْتُهٗ عَمَدًا اَوْ خَطَا ًٔ سِرًّا اَوْ عَلَانِيَةً وَّاَتُوْبُ اِلَيْهِ مِنَ الذَّنْبِ الَّذِیْٓ اَعْلَمُ وَ مِنَ الذَّنْبِ الَّذِىْ لَآ اَعْلَمُ اِنَّكَ اَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوْبِ وَ سَتَّارُ الْعُيُوْبِ و َغَفَّارُ الذُّنُوْبِ وَ لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ اِلَّا بِاللهِ الْعَلِىِّ الْعَظِيْمِ

हिन्दी अनुवाद:

“मैं अपने हर क़दम पर अपने ख़तियाओं की माफी मांगता हूँ, जो मैंने जानबूझकर या बिना जानकर, गुप्त रूप में या सार्वजनिक रूप में किया हो, और मैं उसकी तरफ फिरता हूँ जिनमें से मुझे ज्ञात है और जिनमें से मुझे नहीं पता। हे अल्लाह, मैं तुझसे यहाँ वह बातें नहीं करता कि मैं तुझे किसी को शरीक बनाऊँ जबकि मेरे पास इसकी जानकारी है, और मैं तुझसे उसकी माफी मांगता हूँ जिसकी मुझे जानकारी नहीं।”

  1. इस कलमा को पूरा पढ़ने के बाद, आपको अपने दिल से माफी मांगनी चाहिए और अपने गुनाहों के लिए खासी निरंतर निजात पाने की दुआ करनी चाहिए।

ध्यान दें कि यह केवल एक धार्मिक प्रक्रिया है और आपकी श्रद्धा और विश्वास के अनुसार यह पाँचवाँ कलमा पढ़ना और उसका अर्थ समझना महत्वपूर्ण हो सकता है।

Panchwa Kalma Astaghfar (पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र) पढ़ने के फायदे

“पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र” पढ़ने के कई धार्मिक और मानसिक फायदे हो सकते हैं। यह धार्मिक अभ्यास मानव जीवन को सामान्यत: आनंद, शांति और सात्विकता की ओर माध्यम बना सकता है। कुछ महत्वपूर्ण फायदे निम्नलिखित हैं:

  1. गुनाहों की माफी: “पाँचवाँ कलमा अस्तग़फ़र” के पठन से आप अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और उन्हें छोड़कर नये और उच्च स्तर के आदर्शों की ओर बढ़ते हैं।
  2. शांति और मानसिक स्वास्थ्य: अस्तग़फ़र की प्रक्रिया मानसिक चिंताओं और तनाव से निजात पाने में मदद कर सकती है। यह शांति और स्थिरता की भावना पैदा कर सकता है।
  3. सेल्फ-इमप्रूवमेंट: इस पठन से आप अपने गलतियों को स्वीकार करके उन्हें सुधारने की प्रतिबद्धता दिखाते हैं और अपने स्वयं के व्यक्तिगत विकास की ओर प्रगति करते हैं।
  4. सेल्फ-रिफ्लेक्शन और सामझन: पाँचवाँ कलमा पढ़ते समय आप अपने कृतियों की जांच करने का मौका पाते हैं और इससे आपकी स्वयं की समझ में वृद्धि हो सकती है।
  5. ईमान और स्प्रिटुअलिटी का स्थायित्व: अस्तग़फ़र पढ़ने से आप अपने ईमान को मजबूती देते हैं और आत्मा के साथ अधिक संवाद स्थापित करते हैं।
  6. समाज में अच्छे व्यवहार की प्रोत्साहना: अस्तग़फ़र की प्रक्रिया से आपके व्यवहार में सुधार हो सकता है और आप समाज में अच्छे रूप से बरताव करते हैं।
  7. कर्मों की संवेदनशीलता: इस पठन से आप अपने कर्मों की संवेदनशीलता बढ़ा सकते हैं और यह आपको उन्हें नीति और ईमानदारी से करने की प्रेरणा देता है।

यह सभी फायदे व्यक्ति के मानसिक, शारीरिक और आत्मिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद कर सकते हैं।

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5 कलमा अस्तग़फ़र का मतलब क्या है?

पाँचवाँ कालिमा (अस्तग़फ़ार) क्या है? माफ़ी के लिए दुआ पाँचवीं कालिमा, जिसे अस्तग़फ़र भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है क्षमा माँगना। क्षमा उस व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करती है जो वास्तव में अपने किए पर बुरा महसूस करता है। इसके लाभ असाधारण हैं, एक सचेत और जानबूझकर दिल से मांगी गई माफी उस बोझ से राहत दिलाती है जो व्यक्ति महसूस करता है।


किस कालिमा को अस्तग़फ़र भी कहा जाता है?

पाँचवाँ कालिमा (अस्ताघफ़र)।

अस्तग़फ़ार के क्या फायदे हैं?

अस्तग़फ़ार व्यक्ति की आत्मा को शुद्ध करता है। जो कोई भी अपने गलत कामों के कारण अपनी आत्मा पर बोझ महसूस करता है, वह अल्लाह से माफ़ी मांगकर अपनी आत्मा में हल्कापन और शांति महसूस कर सकता है। ISTAGHFAR प्रावधान को बढ़ाने में मदद करता है। यदि आप चाहते हैं कि अल्लाह (SWT) आपके प्रावधानों को बढ़ाए तो आपको ISTAGHFAR अवश्य करना चाहिए।

क्या इस्तिग़फ़र और अस्तग़फिरुल्लाह एक ही हैं?

इस्तिग़फ़ार” का अर्थ है अल्लाह से प्रार्थना करना कि वह प्रार्थना करने वाले को इस दुनिया और उसके बाद दोनों में सांसारिक इच्छाओं से बचाए। अस्तागफिरुल्लाह का शाब्दिक अनुवाद है “मैं ईश्वर से क्षमा चाहता हूँ।


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